माता चौरासी घंटे वाले मंदिर

माता चौरासी घंटे वाले मंदिर

सुभाषनगर के बदायूं रोड पर स्थित 84 घंटा मंदिर चमत्कारी मंदिर माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर दर्शन मात्र से ही सभी लोगों की मन की मुरादें पूरी होती हैं। मुराद पूरी होने पर भक्त देवी मंदिर में घंटा चढ़ाते है। वर्तमान में इस मंदिर में एक लाख एक हजार 264 घंटे हैं। मंदिर में करीब 44 वर्षो से अखंड ज्योत चल रही है।


माता चौरासी घंटे वाले मंदिर में माता की पूर्व पाषाण की प्रतिमा विद्यमान है। यहां पर हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को पूजा अर्चना की जाती है वहीं नवरात्र के समय शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भंडारे का भी वर्ष में दो बार आयोजन किया जाता है। कार्तिक शुदी प्रतिपदा को अन्नकुट के प्रसाद का वितरण किया जाता है।


इस मंदिर का निर्माण 1969 में किया गया था। जिस स्थान पर मंदिर बना है। उसके पास स्वर्गीय उमाशंकर गर्ग ने मकान बनवाने के लिए यहां पर प्लाट लिया था। मकान बनने के लिए जब नींव खोदी जा रही थी तो उमाशंकर की पत्नी स्वर्गीय शकुंतला देवी के सपने में देवी मां आई और उन्होंने मकान बनवाने से पहले मंदिर बनाने की बात कही। शकुंतला देवी ने जब ये बात पति को बताई तो उमाशंकर ने पहले सड़क के किनारे दुर्गा मां के मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर में एक ही दिन में 84 घंटे चढ़ाए गए। जिसके कारण मंदिर का नाम 84 घंटा मंदिर पड़ा। तब से लेकर अब तक मंदिर में एक लाख से ज्यादा घंटे चढ़ चुके हैं। यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।


देवी मंदिर में 1969 को ज्योति जलाई गई थी। ये अखण्ड ज्योति अभी तक जल रही है। इसके साथ ही मंदिर में शिव परिवार, बजरंगबली की भी मूर्ति भी स्थापित हैं। मां दुर्गा मंदिर की ख्याति इस कदर फैली कि मंदिर में दर्शन के लिए बरेली ही नहीं कई प्रदेश से लोग यहां आते हैं और मनोकामना पूरी हो जाने पर मंदिर में घंटा चढ़ा जाते हैं।