संकट नाशक गणपति स्त्रोत का अर्थ - Sankat Nashak Ganpati Strot Meaning hindi

संकट नाशक गणपति स्त्रोत का अर्थ - Sankat Nashak Ganpati Strot Meaning hindi

संकष्टनाशन गणपति-स्तोत्र का अर्थ
1. भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण करने वाले गौरीपुत्र विनायक के सामने मस्तक (शीश) झुकाकर, उनका नित्य स्मरण कीजिए।
2. पहला नाम वक्रतुंड, दूसरा एकदंत, तीसरा कृष्णपिंगाक्ष और चौथा गजवक्र है।
3. लंबोदर है पाँचवाँ, छठा विकट, विघ्नराजेंद्र सातवाँ और धूम्रवर्ण आठवाँ नाम है।
4. नौवाँ भालचंद्र, दसवाँ विनायक, ग्यारहवाँ गणपति और बारहवाँ गजानन।
5. इन बारह नामों से जो प्रातः, दोपहर आर सायंकाल को तीन बार सभी सिद्धि प्रदान करने वाले प्रभ का चिंतन करते हैं उन्हें किसी भी विघ्न का सामना करना नहीं पड़ता।
6. जिसे जान की इच्छा हो उसे जान, जिसे संपत्ति की इच्छा हो उसे संपत्ति, जिसे पुत्र की इच्छा हो उसे पुत्र और मुमुक्षु को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
7. जो भी इस गणपति स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करेगा उसे छः महीनों में ही उपरोक्त लाभ प्राप्त होंगे और जो भी एक साल तक इस स्तोत्र का पाठ करेगा उसे नि:संदेह सिद्धि प्राप्त होगी।
৪. यह स्तोत्र लिखकर जो आठ ब्राह्मणों को समर्पित करेगा वह गणेशजी की कृपा से विद्वान होगा।

'जो भी इस गणेश स्तोत्र का एक ही बैठक में 144 बार एकाग्रता से पाठ करेगा उसकी कोई भी मनोकामना पूर्ण होगी। ऐसी इस स्तोत्र की महिमा है।